सागौन का वृक्ष

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यह इमारती लकड़ी वाले वृक्ष की श्रेणी में आती है क्योंकि इसकी लकड़ी बहुत ही मजबूत और टिकाऊ होती है । सागौन का वृक्ष एशिया के कई देशों जैसे – भारत, बरमा और थाइलैंड आदि देशों में पाई जाती है । इस वृक्ष की ऊंचाई सामान्यतः 80 से 100 फुट तक होती है तथा तने की मोटाई 35-45 इंच तक होती है । तना का सतह चिकनी अथवा खुरदुरा होता है । ये प्रायः पतझड़ किस्म वाले वृक्ष होते हैं अर्थात ग्रीष्म काल में जल की खपत कम करने और जल की बचत हेतु अपने पत्ते गिरा देते हैं । कुछ जगहों की वृक्ष सदाबहार रहती है अर्थात वर्षभर हरा – भरा रहता है । इसकी छाल मोटी और भूरे रंग की होती है । जड़ गहराई तक जाने में सक्षम होता है ताकि गहराई से पानी तथा खनिज लवणों की आपूर्ति कर सके । इसका फूल गुच्छे में लगती है तथा उभयलिंगी होती है । इसके पत्तों का आकार काफी बड़ा होता है । इसके नवविकसित पत्तों जो अत्यंत छोटे तथा लाल अथवा संतरा रंग के होते हैं को पानी के साथ मलने पर झाग देती है । इसके अलावा इन कोमल नवविकसित छोटे पत्तों को किसी ठोस अथवा सूखे सतह पर रगड़ने पर लाल रंग देते हैं ।

सागौन का वृक्ष इमारती लकड़ी के रूप में अत्यंत उपयोगी होती है । इसके लकड़ी से विभिन्न प्रकार के फर्नीचर जैसे – दरवाज़ा, कुर्सी, टेबल, बिस्तर आदि बनाए जाते हैं । इसका इमारती लकड़ी के रूप में उपयोग के पीछे इसका मुख्य कारण सागौन वृक्ष का लकड़ी मजबूत, टिकाऊ, हल्का एवं कम फैलने वाला होता है । यह इमारती लकड़ी के रूप में जितनी उपयोगी होती है उतनी ही महंगी भी होती है । कुछ लोग इसका व्यावसायिक रूप से ढेर सारे पेड़ उगाते हैं ताकि आगे चलकर 15-20 सालों में यह वृक्ष इमारती लकड़ी के रूप में उपयोग हेतु तैयार हो जाए और इसे वे बेचकर अर्थात इसका फर्नीचर बनाकर इससे अच्छा खासा मुनाफा कमा सकें ।

इस लकड़ी की उपयोगिता को देखते हुवे जंगलों में इस वृक्ष की गैरकानूनी रूप से कटाई भी का जाती है । 

सागौन वृक्ष की प्रजातियां

वैसे तो एशिया में भिन्न – भिन्न प्रकार की सागौन वृक्ष आपको देखने को मिल जाएंगे लेकिन भारत में मुख्य रूप से सागौन के निम्न प्रजाति पाई जाती हैं –

1. नीलांबर (मालाबार) सागौन

2. दक्षिणी और मध्य अमेरिकन सागौन

3. पश्चिमी अफ्रीकन सागौन

4. अदिलाबाद सागौन

5. गोदावरी सागौन

6. कोन्नी सागौन

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