रतनपुर (छत्तीसगढ़) – इतिहास | पर्यटन स्थल

9

 रतनपुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित एक प्रचलित दार्शनिक स्थल है ।  यहां का  महामाया देवी का मंदिर अत्यंत प्रचलित है श्रद्धालु दूर – दूर से माता के दर्शन के लिए आते हैं । रतनपुर बिलासपुर – कोरबा मुख्यमार्ग पर 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । इसे चतुर्युगी नगरी भी कहा जाता है जिसका अर्थ है यह चारों युगों ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग) में स्थित स्थल है । रतनपुर कल्चुरी शासकों की राजधानी भी रह चुका है ।

रतनपुर

इतिहास

रतनपुर का इतिहास अत्यंत रोचक रहा है । जब कल्चुरी शासकों का यहां शासन था तब उन्होंने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया था । रतनपुर के रतनपुर नाम को लेकर एक अत्यंत ऐतिहासिक कथा प्रचलित है । 10 वीं शताब्दी में यहां राजा रत्नदेव प्रथम का शासन था । 1045 ई. में जब वे मणिपुर नामक गांव में शिकार करने आए थे तब उन्होंने यहीं वट वृक्ष के नीचे रात्रि में विश्राम किया था । ऐसा कहा जाता है कि जब राजा रात्रि में विश्राम कर रहे थे तब उनकी नींद खुली थी और उन्होंने एक अलौकिक प्रकाश देखा था । उन्होंने वहां आदिशक्ति श्री महामाया देवी की सभा देखी जिसे देखकर वे बेसुध हो गए । ऐसा माना जाता है कि राजा अगले दिन ही अपने राज्य लौट गए और अपने नाम के अनुसार ही उन्होंने रतनपुर राजधानी की स्थापना की तथा यहां 1050 ई. में मां महामाया देवी के भव्य मंदिर का निर्माण कराया इस मंदिर में महाकाली,महासरस्वती और महालक्ष्मी स्वरुप देवी की प्रतिमाए विराजमान है । 

ऐसा माना जाता है कि जब जब भगवान शिव आदि शक्ति देवी सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे तब देवतागण अनर्थ घटना के भय से भगवान विष्णु के पास गए और देवताओं के आग्रह पर भगवन विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से पार्थिव शरीर को काटा था । ऐसा माना जाता है कि इसी रतनपुर क्षेत्र में देवी सती का दाहिना स्कंद गिरा था । ऐसा माना जाता है कि भगवन शिव ने स्वयं उसे कौमारी शक्ति पीठ का नाम दिया था । इसी तरह एक शक्ति पीठ की स्थापना रतनपुर में भी स्थापित कि गई है ।

1407 में रतनपुर दो भागों में बंट गया और रतनपुर का एक हिस्सा रायपुर में चला गया । यह 18 वीं सदी तक हैहय वंशी राज्य की राजधानी रही मगर अंग्रजों के आगमन के पश्चात रायपुर को मुख्यालय बना दिया गया । 

दर्शनीय स्थल

महामाया मंदिर

यह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । यह मंदिर 52 शक्तिपीठ में से एक है । जब 10 वीं – 12 वीं शताब्दी में यह मंदिर बनाया गया था तब यह मंदिर महा काली, महा लक्ष्मी और महा सरस्वती के लिए बनाया गया था । कुछ समय पश्चात विक्रम संवत 1552 में राजा बहार शाय ने यहां एक और महा लक्ष्मी और महा सरस्वती मंदिर का निर्माण कराया । महामाया देवी रतनपुर की कुलदेवी है । यहां हनुमान और शिव मंदिर भी स्थित है । इस क्षेत्र में कई मंदिर और ढेर सारी तालाब भी स्थित है ।

इसके अलावा अन्य दर्शनीय स्थल निम्न है –

  • काल-भैरव मंदिर
  • लखनी देवी मंदिर (हनुमान मूर्ति)
  • वृद्धेश्वर नाथ मंदिर (बूढ़ा महादेव)
  • श्री गिरिजाबंध हनुमान मंदिर
  • रामटेकरी मंदिर
  • खूंटाघाट जलाशय
  • सिद्धि विनायक मंदिर
  • राधा माधव धाम

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here