राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission)

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 कई जगहों पर सामान्य कंप्यूटर से काम करना बहुत मुश्किल होता है ऐसे में इन कार्यों के लिए अधिक शक्ति वाली कंप्यूटर की आवश्यकता होती है । अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र, मौसम विज्ञान जैसे जगहों पर ऐसे कंप्यूटर की ज्यादा आवश्यकता होती है । इन जगहों पर डाटा एकत्रित करने के लिए शक्तिशाली कंप्यूटर की आश्यक्ता होती है ताकि कंप्यूटर सही से चले ।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (Natinal Supercomputing Mission)

क्या है राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

बढ़ते टेक्नोलॉजी के साथ – साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग भी बढ़ रही है साथ है लगभग सभी क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का उपयोग भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है जिसमें से कंप्यूटर एक है । भारत के विभिन्न प्रकार के रिसर्च और डेवलपमेंट संस्थाओं को प्रोत्साहन देने तथा अच्छे कंप्यूटर उपकरण द्वारा डाटा एकत्रण की प्रक्रिया को सटीक तथा सही बनाने के लिए उन्हें स्वदेशी सुपरकंप्यूटर प्रदान करने का मिशन ही राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन है । इस मिशन के लिए 4500 करोड़ राशि कि सहायता दी गई है ।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की शुरुवात 25 मार्च 2015 को आर्थिक मामला सम्बंधित मंत्रिमंडल समिति द्वारा मंजूरी देने के बाद हुई । इस मिशन के लिए 4500 करोड़ राशि की मंजूरी हुई तथा मिशन को 3 चरणों में विभाजित किया गया । इस मिशन का पहला चरण कबका खत्म हो गया है और  दूसरा चरण अभी 2020 में चल रही है । तीसरे चरण की घोषणा भी जनवरी 2021 के लिए कर दी गई है ।

इस मिशन में एक खास बात यह भी है कि सुपरकंप्यूटर भारत में बनाए जाएंगे इसमें बाहर से कोई भी कंप्यूटर इंपोर्ट नहीं की जाएगी । इस मिशन को  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (MeitY) द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित हैं तथा इसका नोडल अजेंसी प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बंगलूरू को बनाया गया है । 

इस मिशन के तहत देश को कुल 50 सुपरकंप्यूटर सौंपना है । इस मिशन का सबसे पहला सुपरकंप्यूटर “परम शिवाय” है जिसे IIT BHU में स्थापित किया गया है और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में यह सुपरकंप्यूटर BHU को दिया गया । यह सुपर कंप्यूटर एक लाख बीस हज़ार कंप्यूट कोर (सीपीयू + जीपीयू कोर) का उपयोग करता है, जो 833 टेरफ्लॉप्स की चरम गणना शक्ति प्रदान करता है।  वर्ष 2021 में 45 petaflops स्पीड वाली सुपरकंप्यूटर बनाने का उद्देश्य रखा गया है ।

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