एम एस पी (MSP) | न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है और किसानों के लिए कितना जरूरी है

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 एम एस पी का मतलब होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात किसानों को उनकी पैदावार के लिए एक निश्चित मूल्य देना चाहे बाहरी बाजार में उसकी कीमत कम ही क्यों न हो । पहले अगर किसी फसल की पैदावार ज्यादा होती थी तो बाजार में उसका मूल्य बहुत ही कम हो जाता था जिस कारण से किसानों को उनकी मेहनत और पैदावार की कीमत नहीं मिल पाती थी इसी कारण से एम एस पी (MSP) लाया गया ।

एमएसपी (MSP) या न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है और इसका इतिहास

1950 – 1960 के दशक में जब किसी फसल की पैदावार बहुत ज्यादा होती थी तब किसानों को बहुत ही कम दाम मिल पाता था जिसके कारण से किसान परेशान थे । उन्हें फसल में लगाए पैसे और मेहनत के भी पैसे नहीं मिल पाते थे इस कारण से किसानों ने कई आंदोलन किए । सरकार को भी फूड मैनेजमेंट का खतरा सताने लगा । ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार को किसानों के हित में कुछ न कुछ कदम उठाने थे जिससे उन्हें उनकी फसल की सही मूल्य मिल सके चाहे फसल की पैदावार बहुत ही क्यों न बढ़ जाए ।

इस समस्या से निपटने के लिए कई कमेटी बनाई गई ताकि किसानों के इस समस्या का समाधान निकाला जाए । सन् 1964 में एल के झा (L K Jhaa) के प्रयासों से किसानों के हित के लिए एक कमेटी “फूड – ग्रेन – प्राइस कमेटी” की स्थापना की गई जिसका उद्देश्य किसानों के हित में कार्य करना था । कुछ समय पश्चात इसी “फूड ग्रेन प्राइस कमेटी ” से प्रेरित होकर सन् 1965 में ” भारतीय खाद्य निगम (FCI)” की स्थापना की गई । इसके अलावा किसानों के हित में एक अन्य कमेटी ” एग्रीकल्चर प्राइसेज कमीशन (APC)” की स्थापना की गई , कुछ समय पश्चात 1984 में इसका नाम बदलकर “कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस (CACP) कर दिया गया ।

सरकार इसी ” कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस ” के सिफारिश पर फसल के सीजन से पहले एक निश्चित “न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)” तय करता है । पहले से न्यूनतम मूल्य तय करने का यह लाभ होता है कि अगर पैदावार बढ़ भी जाने पर तथा बाजारों में मूल्य कम भी हो जाने पर सरकार फसल को एक निश्चित कीमत पर खरीदती है जिससे किसानों को एक सही कीमत मिल जाती है । 

“भारतीय खाद्य निगम (FCI)” वह निगम है जो किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य में अनाज खरीदता है और संग्रहित करता है । इसी अनाज को बाद में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम द्वारा एक उचित मूल्य में लोगों तक पहुंचाती है । इस तरह किसानों को पैदावार बढ़ने पर कम कीमत का सामना नहीं करना पड़ता और एक उचित दाम में किसान अपनी अनाज बेच सकते हैं । एमएसपी का सबसे अच्छा उदाहरण धान और गेहूं जैसे अनाजों को मंडी में एक न्यूनतम मूल्य पर सरकार द्वारा खरीदने से समझा जा सकता है । वर्तमान में 23 फसलों को एमएसपी कैटेगरी के अंदर रखा जाता है । 

किसानों के लिए क्यों जरूरी है एमएसपी (MSP)

किसानों के मुख्य आय का स्रोत होता है उनका अनाज, जिसे वो बेचकर अपना घर चलाता है तथा पैसे बचे तो अपना छोटा मोटा सपना पूरा करता है । किसान किसी भी देश की एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है । उसे यह भी नहीं पता होता है कि वह जिस फसल पर 4 -6 महीने कड़ी मेहनत कर रहा है वो फसल होगी कैसे अर्थात फसल विभिन्न कारणों से खराब होने का भी डर होता है मगर किसान बिना इसकी परवाह किए, बिना किसी लालच के लगातार कड़ी मेहनत करता है । वो भविष्य के बारे में बिना सोचे अपनी अपनी फसल की अच्छी पैदावार के लिए अपना पूरा मेहनत और कुछ पैसे भी लगाता है ताकि अच्छी फसल तैयार हो । कई किसान तो खेती के लिए पैसे न होने पर लोन भी लेते हैं । ऐसे स्थिति में कई महीनों के मेहनत के पश्चात जब फसल तैयार होती है और उपज अच्छी होती है तब यदि सभी किसानों की उपज अच्छी हुई तो अनाज अधिक मात्रा में उपलब्ध होने के कारण अनाज की कीमत बहुत ज्यादा कम हो जाती है जिस कारण से किसानों को उनकी मेहनत तो दूर की बात उनके द्वारा लगाए गए पैसों का आधा हिस्सा भी नहीं आ पाता जिस कारण से कई किसान अपनी कर्ज नहीं चुका पाते और आत्महत्या कर लेते हैं । ये एक बहुत ही दुखद घटना है कि देश के अन्नदाता को उसकी मेहनत का फल नहीं मिल पाता । इन्हीं हालातो से बचने के लिए सरकार को एमएसपी (MSP) की आवश्यकता पड़ी ताकि अधिक मात्रा में पैदावार किसानों के अनाज के सही कीमत पर कोई प्रभाव न डाले और यह किसानों और देश के हित को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है ।

एमएसपी का निर्धारण कैसे होता है

एमएसपी किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है ऐसे में किसानों को उनकी उपज की सही कीमत दिलाने के लिए उनकी आर्थिक लागत को देखी जाती है बल्कि उनकी पारिवारिक श्रम, मांग, मंडी में कीमत , अंतरराष्ट्रीय बाजार आदि चीजों को अच्छे से ध्यान में रखकर निर्धारण किया जाता है । केवल लागत मूल्य के आधार पर भी इसका निर्धारण करने से किसान नुकसान में होंगे ।

एमएसपी का निर्धारण के लिए सीएसीपी मुख्य भाग अदा करता है । सीएसीपी खेत की लागत द्वारा एमएसपी का निर्धारण के लिए लागत को तीन भागों में बांटता है –

(1) ए2

(2) ए2 + एफ एल

(3) सी2

(1) ए2 – इसके अन्तर्गत किसानों के नगदी खर्चों को ध्यान में रखा जाता है तथा प्राप्त आंकड़ों का उपयोग एमएसपी के निर्धारण में किया जाता है । इसमें किसान द्वारा किए गए खर्च जैसे – सिंचाई, खाद, दवाई, बीज आदि के खर्च को ध्यान रखा जाता है ।

(2) ए2 + एफ एल – इसमें किसान और और उसके परिजनों द्वारा किए के खेत में मेहनत को अनुमानित रूप से गणना की जाती है और एमएसपी में इसे जोड़ा जाता है ।

(3) सी2 – इसमें खेत का किराया और कुल पूंजी पर लगने वाला ब्याज को ध्यान में रखा जाता है ।

इस तरह इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर एमएसपी का निर्धारण किया जाता है ।

एमएसपी से किसानों का लाभ

• इससे किसानों को उनकी पैदावार की सही कीमत मिल जाती है ।

• इससे किसानों को लाभ पहुंचाया जा सकता है ।

• अधिक पैदावार से अनाजों की निर्यात बधाई जा सकती है ।

• खेती किसानी को बढ़ावा मिलेगा ।

• एमएसपी के आने से किसानों द्वारा सरकार को अनाज बेचने वालों को संख्या में बढ़त देखी गई है जो खेती किसानी में बढ़ती रुचि नजर आ रही है ।

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