कुंदरु | तिंडोरा | तेंडली – एक प्रकार की भारतीय सब्जी

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 कुंदरु या तिंडोरी या कहें तेंदली इसके अनेकों नाम है हर जगह इसके भिन्न भिन्न नाम है । यह परवल की तरह ही दिखने वाली सब्जी है जिसे पका के खाया जाता है ।

वैज्ञानिक नाम – कॉक्सिनिया ग्रेंडिस (Coccinia Grandis)

वैज्ञानिक वर्गीकरण –

जगत (Kingdome) – प्लैंटी (Plantae)

गण (Order) – कुकुरबितेल्स (Cucurbitales)

कुल ( Family) – कूकुरबिटेसी ( Cucurbitaceae)

वंश(Genus) – कोक्सिनिया (Coccinia)

जाति (Species) – कॉक्सिनिया ग्रेंडिस (Coccinia Grandis)

विभिन्न क्षेत्रों में इसके नाम 

कुंद्रू, कुंदरु, तींडोरा, तेंडेली – हिंदी

कुंदुली – आसमिस

बिंबिका – संस्कृत

तिलकोर – मैथिली

तोंडली – मराठी

कोवाई – तमिल

कोवा – मलयालम

डोंडा काया – तेलगु

तोंडे काई – कन्नड़

तेलकुचा, कुंद्री – बंगाली

बन कूंद्री – ओडिया

क्या है कुंदरु ? विस्तार से जानें 

कुंदुरू एक भारतीय सब्जी है जिसे पका कर खाया जाता है । यह केवल भारत में नहीं बल्कि पूरे एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे महाद्वीप में पाया जाता है । एशिया महाद्वीप में यह भारत, चीन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, कोलंबिया, वियतनाम आदि देशों में पाई जाती है ।

कुंदरु की लता बहुत तेजी से फैलती है जिस कारण से कुछ देशों में इसे खरपतवार की तरह माना जाता है । इसकी लताएं तेजी से फैलने का मुख्य कारण इसके तना से भी नए पौधे का विकसित होना होता है । इसके लता के तेजी से फैलने के साथ साथ इसका फल भी बहुत अधिक मात्रा में लगते हैं । भारत में कई क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है । 

इसका नाम अलग अलग जगहों में अलग होता है इसलिए हो सकता है लोग इसे न समझे । यह परवल के भांति का ही एक सब्जी होता है । इसे पकाकर खाया जाता है तथा कई जगहों में इसके पके फलों को या कच्चे फलों को आंचार बनाकर रखा जाता है ।

यह उष्णटिबंधीय पौधा होता है तथा पौष्टिक गुणों से परिपूर्ण होता है । इसके कच्छे फल को पका कर खाया जाता है । इसे कच्चा भी खीरा – ककड़ी की भांति खाया जा सकता है और कई लोग खाते भी है । इसकी पैदावार अधिक होती है जिस कारण से इसकी कीमत कम रहती है और लोग आसानी से इसे खरीद सकते हैं । 

भौतिक स्वरूप

यह 1 से 1.5 सेंटीमीटर व्यास तथा 3 से 4 सेंटीमीटर लंबा होता है, इसका आकार बेलनाकार होता है तथा कुछ जगहों में यह अंडाकार भी होता है जहां यह 15 मिमी व्यास तथा 30 मिमी लंबा होता है । इसकी पत्तियां परवल के पत्तों की भांति होती है मगर ये कोमल तथा पतली होती है । कुंदरु का छोटा फल हल्का हरा और सफेद रंग का होता है, धीरे – धीरे विकसित होकर यह थोड़ा गहरा हरा होता है तथा इसमें कई सफेद रंग की धारियां दिखाई देने लगती हैं । जब इसमें हरा रंग थोड़ा गहरा होता है तथा सफेद धारियां विकसित होने लगती है तब इसे तोड़ लेनी चाहिए और ये सब्जी पकाने लायक हो जाती है। इसके पश्चात यदि गहरा हरा रंग हुए कुछ दिन होने पर यह अंदर से पकने लगता है और इसे काटकर देखने से अंदर का रंग लाल दिखाई देता है । जब यह फल पूरी तरह पक जाती है तब यह लाल रंग की हो जाती है ।

कुंदरु की खेती

इसकी खेती करना आसान है क्योंकि इसमें उतना ध्यान रखने की जरूरत नहीं पड़ती और इसके लता से ही कई नए लता/ पौधों का उत्पादन किया जा सकता है । इसके खेती के लिए इसका बीज का प्रयोग न करके इसके लता को विभिन्न भागों में काटकर उगाया जाता है और प्रत्येक भागों से एक नया लता विकसित हो जाता है । इसकी लता बहुत ज्यादा फैलती है इस कारण से इसका पैदावार भी अच्छी होती है । इसकी खेती कलम विधि से की जाती है जिसमें इसकी तथा को भिन्न – भिन्न भागों पर काटकर छोटे छोटे गमलों तथा पॉलीथिन में उगाया जाता है तथा कुछ दिनों बाद ही इसमें कलियां निकलना चालू हो जाता है जिसे उगाने वाले स्थान पर प्रतिस्थापित कर दिया जाता है ।

इसकी खेती गार्डन, खेत कहीं भी की जा सकती है । इसमें समय समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है अन्यथा फल अंदर से पकने लगते हैं जो सब्जी बनाने पर स्वाद बिगाड़ देता है । इसे घर के एकदम नजदीक उगाने पर इसमें लगे कीड़े घर के अंदर भी आ सकते हैं । 

उपयोग तथा औषधीय महत्व

1. यह मोटापे को कम करने में मददगार माना जाता है इसमें पाया जाना वाला एंटी-एडिपोजेनिक एजेंट मोटापे को कम करने का गुण रखता है ।

2. इसमें मौजूद 1.7 मिलीग्राम आयरन की मात्रा दैनिक थकान को कम करने में लाभदायक होती है ।

3. यह एक हैल्थी सब्जी है जो हमारे मेटाबोलिक क्रियाओं को अच्छे से समन्वय करने में मददगार होती है ।

4. इसे मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक माना जाता है ।

5. पाचन क्रिया को मजबूत करने में यह उपयोगी होता है ।

6. यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाता है ।

7. इसका जूस ब्लडप्रेशर में फायदेमंद माना जाता है ।

8. इसमें कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जो हमारे हड्डियों को मजबूती प्रदान करती है ।

9. इसके सेवन से किडनी स्टोन की समस्या धीरे धीरे कम होती है । इसमें मौजूद कैल्शियम किडनी स्टोन को दूर करने में मददगार होती है ।

10. मसूड़े में हुई छिलन को दूर करने के लिए कुंदरु के फूल के रस को छीलन वाली जगह पर लगाने से छिलन ठीक हो जाती है ।

कमियां

कुंदरु में कुछ ऐसी चीजे भी होती है जो आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है इसलिए अगर आप किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हैं तो इसका सेवन करने से पहले एक बार चिकत्सकों से परामर्श जरूर लें ।

1. इसे रक्त में शर्करा की मात्रा कम होती है इसलिए यदि आप सुगर के मरीज है तब चिकित्सक से सलाह लेने पर ही सेवन करें तथा समय समय में अपना सुगर लेवल चेक कराते रहें ।

2. गर्भवती महिलाओं के लिए इसे नुकसानदायक माना जाता है तथा स्तनपान कर रही महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

3. सर्जरी कराए हुए मरीज को भी कुछ दिनों के लिए इसका सेवन नहीं करना चाहिए ।

4. ऐसा माना जाता है कि इससे मानसिक शक्ति कम होती है ।

5. कड़वा कुंदरु खाने से उल्टी होती है ।

Note – यहां बताए गए औषधीय महत्व का बिना चिकित्सकीय सलाह के प्रयोग में बिल्कुल भी न लाएं क्योंकि इससे आपको कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है इसलिए चिकित्सकीय सलाहों के बिना इसका बिल्कुल प्रयोग न करें ।

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