हार्मोन क्या होता है ?

8

 हार्मोन अतः स्त्रावित जटिल कार्बनिक पदार्थ होते हैं । यह जीवों में होने वाली विभिन्न क्रियाओं जैसे वृद्धि, विकास, प्रजनन आदि को प्रभावित करती है । हार्मोन किसी विशेष ग्रंथि से स्त्रावित होकर सजिवों में एक विशेष कार्य को उत्प्रेरित अथवा प्रभावित करता है । हार्मोन का एकत्रण अंग के अंदर नहीं होता अपित जब आवश्यकता होती है तब यह स्त्रावित होती है और संबंधित अंग को प्रभावित करती है और कार्य के पश्चात समाप्त हो जाती है । एक हार्मोन केवल टारगेटेड अंग को ही प्रभावित करती है । कई बार ऐसा होता है कि हार्मोन की कुछ ज्यादा मात्रा निकल जाती है जिस कारण से टारगेटेड कोशिका अथवा हार्मोन ग्रंथि की आस पास की कोशिका इससे बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं ।

खोज

हार्मोन की खोज एक लक्ष्यित खोज न होकर एक आकस्मित खोज है । वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे थे कि पाचन क्रिया कैसे कार्य करता है । पाचन क्रिया के अध्यन्न के दौरान ही वैज्ञानिकों को एक नया पदार्थ प्राप्त हुआ जो पाचन क्रिया में उपयोग होती थी । हार्मोन की खोज “अर्नोल्ड एडोल्फ बर्थोल्ड ( Arnold Adolph Berthold)” द्वारा 1849 में तथा “बेलिस और स्टारलिंग ( Bayliss and Starling) द्वारा 1902 में एक अपरिचित तरल के रूप में हुई ।

अर्नोल्ड एडोल्फ बर्थोल्ड ( Arnold Adolph Berthold) – 1849

वे जर्मन के रहने वाले के फिजियोलॉजी और जूलॉजिस्ट थे । 1849 में उनके दिमाग में एक सवाल आया कि वृषण (Testes) कार्य कैसे करता है ? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए वे वृषण को लेकर प्रयोग कर रहे थे । उन्होनें गौर किया कि एक भुने हुवे मुर्गे और वृषण मौजूद मुर्गा समान रूप से लैंगिक व्यवहार नहीं करते । इस तरह के लैंगिक व्यवहार को समझने के लिए उन्होंने एक प्रयोग करने के बारे में सोचा । उन्होंने एक मुर्गे को उसके वृषण सहित प्रयोग में लाया तथा उसने देखा कि मादा के प्रति उसका लैंगिक व्यवहार बदल रहा है वही प्रयोग उसने बिना बिना वृषण वाले मुर्गे के साथ किया और पाया कि इसमें वो व्यवहार नहीं है जो पहले वाले में था । इस तरह कई अन्य प्रयोगों के बाद उसने पाया कि वृषण से एक खास तरह का द्रव्य निकलता है जो विभिन्न प्रकार के लैंगिक प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है । यह द्रव्य ही हार्मोन है ।

बेलिस और स्टारलिंग ( Bayliss and Starling) -1902

ये दोनों जब पाचन क्रिया के बारे में अध्ययन कर रहे थे तब इन्हें एक बात पर संदेह था कि क्या तंत्रिका तंत्र पाचन तंत्र को प्रभावित करती है ? इसके लिए उन्होंने प्रयोग में जंतु मॉडल के तंत्रिका तंत्र को काट दिया । उन्हें यह बात पता थी कि अग्नाशय पाचक रस के स्त्रावण में शामिल है । जब उन्होंने तंत्रिका तंत्र को काट दिया तब उन्होंने पाया कि यह पाचन क्रिया में उतना ज्यादा सम्मिलित नहीं है । उन्होंने पाया कि एक खास तरह का द्रव्य जो रक्त में मिलकर पाचक रस के स्त्रावण को प्रभावित कर रही है । यही रस अग्नाशय को पाचक रस स्त्रावित करने के लिए प्रेरित कर रहा था । तब तक हार्मोन शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था इसलिए ऐसे सेक्रेटिन नाम दिया गया ।

परिचय

हार्मोन हमारे लिए तथा पदपों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है । इस पोस्ट में केवल हम जंतु हार्मोन्स के बारे में ही बात करेंगे । चाहे हमारे शरीर की विकास हो या चाहे किसी क्रिया की प्रतिक्रिया हो इन सभी जगहों में हार्मोन का एक महत्वपूर्ण हाथ होता है । जैसे – जब हम किसी चीज को देखकर डर जाते हैं तो हमारे शरीर के एड्रिनल ग्रंथि से एड्रिनेलीन नामक हार्मोन का स्त्रावण करती है जो हमें डर कर प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित करती है । या तो हम डर कर भाग जाते हैं या डर का सामना करते हैं यह प्रतिक्रिया एड्रेनेलिन नामक हार्मोन के कारण होता है । इसके अलावा हमारे शरीर का विकास, मूड में बदलाव, लैंगिक क्रियाएं, पाचन, विभिन्न अंग का कार्य आदि को हार्मोन ही प्रभावित करती है ।

अमीनो एसिड वाले हार्मोन जल में घुलनशील होते हैं जो किसी कोशिका के सतह पर द्वितीय मैसेंजर की भांति कार्य करती है और कोशिका के कार्य का नियंत्रण करती है । स्टेरॉइड हार्मोन प्लाजमा में घुलनशील होती है जिस कारण से ये प्लाजमा द्वारा नाभिका में जाकर क्रिया करती है । हार्मोन दूर तक यात्रा करके निश्चित रिसेप्टर से जुड़ जाती है और टारगेटेड कोशिका के क्रियाओं को परिवर्तित कर देती है । जब एक रिसेप्टर से हार्मोन जुड़ता है तब एक सिग्नल जाता है और जिन ट्रांसक्रिप्शन चालू हो जाता है और यह निर्धारित प्रोटीन के व्यवहार को बढ़ा देता है । 

हार्मोन का स्त्रावण कई उत्तकों में हो सकती है । अतः स्त्राव ग्रंथि का अच्छा उदाहरण कार्डिनल है लेकिन विभिन्न प्रकार विशेष कोशिकाओं द्वारा भी हार्मोन का स्त्रावण होता है । हार्मोन का स्त्रावण विभिन्न सिग्नल्स के जवाब में होती है । जैसे कि – रक्त शर्करा इंसुलिन संश्लेषण को प्रभावित करती है । सीरम कैल्शियम एकाग्रता पैरा थायरॉयड हार्मोन के संश्लेषण को प्रभावित करती है । 

हार्मोन के संकेत प्रक्रिया में निम्न स्टेप सामिल है

1. निश्चित उत्तक में निश्चित हार्मोन का बायोसिथेसिस ।

2. हार्मोन का संग्रहण एवं स्त्रावण ।

3. हार्मोन का टारगेटेड कोशिक की ओर गति ।

4. हार्मोन से संबंधित कोशिका झिल्ली या इंट्रासेल्युलर रिसेप्टर प्रोटीन द्वारा हार्मोन की पहचान करना ।

5. प्राप्त हार्मोनल संकेत का सिग्नल पारगमन द्वारा रिले एवं प्रवर्धन – इसके बाद कोशिकीय प्रतिक्रिया होती है। फिर लक्ष्य कोशिकाओं की प्रतिक्रिया को मूल हार्मोन-उत्पादक कोशिकाओं द्वारा पहचाना जा सकता है, जिससे हार्मोन उत्पादन में गिरावट होती है। यह एक होमोस्टैटिक नकारात्मक प्रतिक्रिया लूप का एक उदाहरण है।

6. इसके पश्चात हार्मोन को छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है ।

हार्मोन उत्पादन करने वाली कोशिकाएं विशेष तरह की कोशिकाएं होती है जो मुख्य रूप से अतः स्त्रावी ग्रंथि के अंदर होती है । 

प्रकार

वर्टीब्रेट्स में हार्मोस निम्न प्रकार के होते हैं –

1. पेप्टाइड हार्मोन

2. अमीनो एसिड हार्मोन

3. स्टीरॉयड हार्मोन

4. इकोसानॉयड हार्मोन

1. पेप्टाइड हार्मोन – यह अमीनो एसिड के लंबी चेन श्रृंखला से बनी होती है । एक पेप्टाइड चेन में 3 से लेकर सैकड़ों अमीनो एसिड हो सकते हैं । उदाहरण – ऑक्सीटोसिन, इंसुलिन ।

2. अमीनो एसिड हार्मोन – ये अमीनो एसिड से बनी होती है तथा पुटिकाओं में इसका संग्रहण होता है । उदाहरण – थायरोक्सिन

3. स्टीरॉयड हार्मोन – ये कोलेस्ट्रॉल से उत्पन्न होते हैं । उदाहरण – सेक्स हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन इत्यादि ।

4. इकोसानॉयड हार्मोन – ये लीपिड्स से उत्पन्न होते हैं । उदाहरण – प्रोस्टाग्लैंडीन और थ्रोम्बोक्सेन इत्यादि ।

हार्मोन का प्रभाव –

हार्मोन्स हमारे शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है यह हमारे शरीर में निम्न तरह से प्रभाव दिखाता है –

1. शारीरिक विकास को प्रभावित करती है ।

2. चापचयी क्रिया को प्रभावित करती है ।

3. पाचन क्रिया को प्रभावित करती है ।

4. नींद लगना ना लगना को प्रभावित करती है ।

5. प्रतिरक्षा शक्ति को सक्रिय करना तथा निष्क्रिय करना ।

6. स्वभाव में बदलाव

7. शारीरिक प्रतिक्रियाओं जैसे गुस्सा होना, डरना, प्यास लगना, भूख लगना आदि को प्रभावित करती है ।

8. युवावस्था तथा वृद्धावस्था का प्रवेश ।

9. लैंगिक विकास ।

ये कुछ प्रमुख प्रभाव हैं इनके अलावा भी हार्मोन हमारे शरीर को छोटे – बड़े कई तरह से प्रभावित करते हैं ।

रिसेप्टर

प्रत्येक हार्मोन को ग्रहण करने के लिए एक विशेष तरह का रिसेप्टर होता है । एक कोशिका में कोई एक अथवा एक से अधिक हार्मोन्स को ग्रहण करने के लिए रिसेप्टर हो सकता है । 

विभिन्न हार्मोन ग्रंथि एवं हार्मोन्स 

1. पीयूष ग्रंथि 

पीयूष ग्रंथि को मानव शरीर का सबसे बड़ी ग्रंथि माना जाता है इससे विभिन्न प्रकार के हार्मोन का स्त्रावण होता है । 

(i) थायराइड स्टीम्युलेटिंग हार्मोन (TSH) – यह थायरोक्साइन (thyroxine) और ट्राई-आयोडोथायोनिन (tri-iodothyronine) के स्त्रावण में सहायता करता है ।

(ii) ग्रोथ हार्मोन (GH) – यह शरीर विकास (कद, हड्डी, मांसपेशियों आदि) में सहायक होता है अथवा मुख्य भूमिका निभाता है ।

(iii) फोलिकल स्टीम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) – यह एक लैंगिक हार्मोन है जो पुरुषों में टेस्टोस्टीरॉन के निर्माण में तथा महिलाओं में ओवुलेशन से पहले अंडाशय में अंडे और अंडाशय के फोलिकल्स के निर्माण में सहायक होता है ।

(iv) लूटिनिसिंग हार्मोन (LH) – यह हार्मोन पुरुषों में टेस्टोस्टीरॉन तथा महिलाओं में अंडा के निर्माण और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के बनने में सहायक होता है ।

(v) प्रोलैक्टिन (PLR) – यह मलिलाओं में दुग्ध निर्माण को प्रेरित करती है ।

(vi) एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोफिक हार्मोन (ACTH) – यह कार्टिसोल निर्माण के लिए एड्रीनल ग्रंथि को प्रेरित करता है ।

(vii) वैसोप्रीसिन – यह हार्मोन गुर्दे के द्वारा आवश्यक तरल पदार्थ बनाने और रक्त वाहिकाओं के संकुचित होने में मदद करता है जिससे शरीर में रक्तचाप नियंत्रण में रहता है ।

(viii) ऑक्सीटोसिन – यह हार्मोन प्रसव के दौरान गर्भाशय संकुचन तथा माताओं में दुग्ध निर्माण की क्रिया को प्रेरित करता है ।

2. हाइपोथैलेमस

(i) थाईरोट्रोफिन रिलीजिंग हार्मोन (TRH) – इसका कार्य पीयूष ग्रंथि से “थायराइड स्टीम्युलेटिंग हार्मोन” के स्त्रावण में सहायता करना है ।

(ii) सोमेटोस्टेन – यह पीयूष ग्रंथि से ग्रोथ हार्मोन के स्त्रावण को रोकता है ।

(iii) गोंडाट्रोफिन रिलीजिंग हार्मोन – यह पीयूष ग्रंथि में फोलिक्स स्टीम्युलेटिंग हार्मोन और लूटिनिसिंग हार्मोन के स्त्रावण में सहायता करता है ।

(iv) कॉर्टिकोट्रॉफिन रिलीजिंग हार्मोन (CRH) – यह पीयूष ग्रंथि में एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोफिक हार्मोन के स्त्रावण में सहायक होता है ।

(v) ग्रोथ हार्मोन रिलीजिंग हार्मोन – यह पीयूष ग्रंथि में ग्रोथ हार्मोन के स्त्रावण में सहायक होता है ।

3. थाइरायड ग्रंथि

(i) थायरोक्साइन या टी 4 – यह शरीर में चपाचयी (मेटाबॉलिज्म) दर को नियंत्रित करती है ।

(ii) टाई-आयोडोथायोनिन या टी 3 – यह भी शरीर में चपाचयी (मेटाबॉलिज्म) दर को नियंत्रित करती है ।

4. पैराथायराइड ग्रंथि

(i) पैराथायराइड हार्मोन – यह रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने का कार्य करती है । यदि रक्त में कैल्शियम की मात्र कम हो जाती है तो उसे यह बढ़ाने का कार्य करती है ।

(ii) कैल्सीटोनिन – यह भी रक्त में कैल्शियम के मात्रा को नियंत्रित करने का कार्य करती है लेकिन यह पैराथायराइड हार्मोन के विपरित रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाने पर उसे कम करने का कार्य करती है ।

5. एड्रेनल कॉर्टेक्स 

(i) कोर्टिसोल – यह रक्त में शर्करा के मात्रा का तथा रक्तचाप का नियंत्रण करती है ।

(ii) एल्डोस्टेरोन – यह शरीर में ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने का कार्य करता है ।

(iii) एण्ड्रोजन – यह नर लैंगिक हार्मोन है जो पुरुषों में लैंगिक विकास में सहायता करता है ।

6. एंड्रेनल मेडूला

(i) एड्रेनेलिन – इसे डर हार्मोन अथवा इमरजेंसी हार्मोन भी कहते हैं । हमे डर इसी हार्मोन के स्त्रावण के कारण लगती है । यह हार्मोन हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है ।

7. अग्न्याशय ग्रंथि

(i) इंसुलिन – यह हार्मोन रक्त में शर्करा/ग्लूकोज के मात्रा को कम करने का कार्य करता है ।

(ii) ग्लुकेगोन – यह हार्मोन रक्त में शर्करा/ग्लूकोज के मात्रा को कम बढ़ाने का कार्य करता है ।

(iii) सोमाटोस्टेटिन – यह शरीर में इंसुलिन एवं ग्लुकेगोन के निर्माण को रोकता है । 

8. अंडाशय

(i) एस्ट्रोजेन – यह महिलाओं का लैंगिक हार्मोन है । महिलाओं में लैंगिक विकास में सहायक होता है । गर्भाशय को भ्रूण के लिए तैयार करता है ।

(ii) प्रोजेस्टेरोन – यह महिलाओं में प्रजनन अंगों को विकसित करने में आवश्यक होता है ।

9. वृषण

(i) टेस्टोस्टेरोन – यह पुरुषों में जननांग के विकास में सहायता करता है तथा शुक्राणु निर्माण में आवश्यक होता है ।

इसके अलावा शरीर के कई ऐसे अंग हैं जो विभिन्न प्रकार के हार्मोन्स का निर्माण करते हैं जैसे – पेट, हृदय, किडनी, डियोड़ीनम इत्यादि ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here