कुत्ता पर निबंध (Essay on Dog in hindi)

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Dog

कुत्ता मनुष्यों द्वारा पालन की जाने वाली पहली जानवर है । कुत्ता को वफादार माना जाता है इसलिए लोग इसे पालना पसंद करते हैं । मनुष्यों ने पशुपालन की शुरुवात कुत्ता से ही कि थी । आज के आधुनिक युग में इसे एक जानवर की तरह ही नहीं बल्कि कई लोग इसे परिवार का एक अभिन्न हिस्सा मानकर पालते हैं । कुत्ते कई नश्ल के होते हैं और एक दूसरे से कुछ – कुछ भिन्न – भिन्न होते हैं । कुछ देखने में बहुत प्यारे दिखते हैं तो कुछ बहुत ही ताकतवर और खूंखार । कुत्तों की सूंघने की शक्ति मनुष्यों कि तुलना में 10 हजार से लेकर 1 लाख गुना तेज होती है साथ ही ये बहुत ही बुद्धिमान होते हैं इस कारण से इन्हें पुलिस और आर्मी में भी लिया जाता है और प्रशिक्षक द्वारा इन्हें विशेष तरह की प्रशिक्षण दी जाती है ।

सामान्य जानकारी

कुत्ता एक पालतू पशु है जिसका 4 पैर, 2 आंख, 2 कान और एक पूंछ होती है । ये काफी तेज गति से दौड़ने में सक्षम होते है ये 15-20 किमी / घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते है । इनके सूंघने के शक्ति इन्सानों से 10 हजार से लेकर 1 लाख गुना तेज होती है । ये सर्वाहारी होते हैं अर्थात् ये सबकुछ खा सकते हैं । इसकी सामान्य ऊंचाई  15 से 110 सेमी तक होती है । इनकी दांत नुकीली और पंजों में लंबे लंबे नाखून होते हैं । दरअसल ऐसा माना जाता है कि भेड़िया और कुत्ते एक वंश के हैं क्योंकि इनमें बहुत सारी बाहरी एवं आंतरिक समानताएं पाई जाती है । वैज्ञानिक खोज में यह पाया गया कि कुत्ता और भेड़िया का डीएनए (DNA) लगभग 99% तक समान होता है । एक मनुष्य में केवल 4 तरह की ही रक्त समूह होती है लेकिन कुत्तों में 13 तरह की रक्त समूह होती है । कुत्तों का नुकीला दांत एवं लंबे नाखून वाला पंजा इन्हें शिकार में मदद करता था जब इंसान इन्हें नहीं पालते थे । जंगली कुत्ते अभी भी अपने नुकीली दांत और पंजे का उपयोग शिकार में करते हैं । 
ये कई रंग के होते हैं काले, भूरे, सफेद, चितकबरे आदि । इनकी पाली जाने वाली नस्लों में जर्मन शेफर्ड, बुल डॉग, पग (PUG), ग्रेहाउंड, ब्लड हाउंड इत्यादि प्रचलित है इनके अलावा अनेक नस्ल विकसित किए जा चुके हैं जो इन्सानों द्वारा पाले जाते हैं । खास तरह की नस्ल की कीमत 1000 रुपए से लेकर लाखों रुपए तक हो सकती है । सामान्यतः कुत्तों का जीवनकाल 15 से 20 वर्ष होती है । मादा एक बार में 5 से 7 बच्चे देती है ।
अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जीव कुत्ता ही है । सर्वप्रथम लाईका (Laika) नामक कुत्ते को 3 नवंबर 1957 को सोवियत संघ (रूस) द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया था जहां से वह जीवित भी लौटा था मगर कुछ दिनों पश्चात उसकी मृत्यु हो गई थी । 

स्वभाव

सभी प्रकार के कुत्तों का स्वभाव भिन्न – भिन्न होता है । कुछ कुत्ते बहुत ज्यादा गुस्सैल होते हैं ऐसे कुत्तों से दूर रहना ही सही माना जाता है । इसके अलावा सामान्य रूप से देखा जाए तो गली के कुत्ते और घरों में पाले जाने वाले कुत्ते अपने क्षेत्र के लोगों के लिए शांत स्वभाव के होते हैं, गली में रहने वाले कुत्ते घरेलू कुत्ते की तुलना में ज्यादा शांत होते हैं । ज्यादातर ये देखा गया है कि घर में रहने वाले पालतू कुत्ते बाहरी लोगों को देखकर भौंकने लगते हैं । एक बात अधिकतर कुत्तों में समानता देखी गई है कि जब भी रात के समय में आना – जाना करता है तब वे उस व्यक्ति पर भौंकते हैं । कुछ कुत्ते बहुत ही डरपोक किस्म के होते हैं जो अपने मालिक के आस – पास रहना पसंद करते हैं ऐसे कुत्ते थोड़े शामिल किस्म के होते हैं । इसके अलावा कुछ कुत्ते बहुत चालाक और शरारती होते है ऐसे वे कुत्ते होते हैं जो परिवार में अच्छी तरह से घुल मिल जाते हैं । 
कुत्तों के अंदर भावना होती है । कई रिपोर्ट में यह साबित हो गया है की मालिक खुशी और दुख के घड़ी में ये भी खुश और दुखी होते हैं । इनकी वफादारी बहुत ही ज्यादा होती है अपने मालिक से जुड़ा हो जाने पर कुछ कुत्ते खाना – पीना छोड़ देते हैं यह कुत्ता और इन्सान के बीच के लगाव और प्रेम को दर्शाता है । 

भोजन

जब कुत्ते इन्सानों द्वारा पाले नहीं जाते थे तो वे मांसाहारी थे केवल शिकार करके उसका मांस खाते थे परन्तु जब से इंसानों ने कुत्ता पालना सुरु कर दिया है तब से  वे अन्य चीजें भी खाना सीख गए और अपने आपको मांस के अलावा अन्य खाद्य वस्तुओं को खाने एवं पचाने के लिए अनुकूल कर लिया । इसके अलावा जंगली कुत्ते जंगल में ही रहने के कारण अपनी पुरानी अनुकूलन के अनुसार ही शिकार कर मांस खाते हैं । वैसे तो कुत्ते सबकुछ खा जाते हैं पर कुछ चीजें ऐसी भी होती है जो कुत्तों के लिए हानिकारक होती है । कुत्तों के लिए हानिकारक खाद्य वस्तुओं में चॉकलेट एक है यह जानलेवा भी साबित हो सकता है, चॉकलेट का जानलेवा होने का कारण थियोब्रोमाइन होता है जो कुत्तों में गलत प्रभाव डालता है । घरेलू कुत्ते के सामान्य भोजन में चावल, रोटी, दूध, मांस एवं मछली इत्यादि सामिल है इसके अलावा दुकानों में भी कुत्तों के लिए खास तरह की बिस्कुट मिलती है ।

संपर्क / वार्तालाप

ये इन्सानों की तरह बोल तो नहीं सकते मगर अपने साथी कुत्ते से अपनी भाषा में बात – चीत कर सकते हैं । कुत्ते बौंक कर अथवा रो कर अपनी बात दूसरे कुत्ते तक पहुंचाते हैं । दुस्मन के अपने इलाके में आने पर उसे गुर्रा कर अपने क्षेत्र अथवा इलाके में प्रवेश से रोकते हैं । वैसे ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो कुत्तों के भौंकने की भाषा को समझ नहीं पाते या ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कुत्तों की सभी बात को समझ जाए । पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कुत्तों की ज्यादातर बातों को समझ जाते हैं । ये सामान्यतः इन्सानों के सामने अपनी पूंछ हिलाकर, चांट कर, भौंककर एवं विभिन्न तरह से अपनी बात अपने मालिक तक पहुंचाते हैं । 
एक कुत्ते को ट्रेंनिग द्वारा विभिन्न प्रकार की चीजें सिखाई जा सकती है । कुत्ते के हर हरकत का एक मतलब होता है । ऐसा माना जाता है कि अगर कुत्ते दाहिनी ओर अपनी पूंछ हिलाते हैं तो वे खुश होते हैं तथा यदि वे बाईं ओर पूंछ हिलाते हैं तो वे थोड़े डरे हुए होते है अगर कोई कुत्ता जोर से पूंछ हिलाता है इसका मतलब होता है कि वे गुस्से में है ।

इंसानों के लिए खतरा

कुत्ते वफादार तो होते हैं इसमें कोई शक नहीं है और इनकी ईमानदारी पर कोई सवाल भी नहीं उठता क्योंकि अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए ये अपनी जान भी दे सकते हैं । मगर यह भी याद रखना जरूरी है कि ये एक जानवर हैं और इनमें इन्सानों जैसी समझ नहीं होती । कई कुत्ते बहुत ही गुस्सैल और खतरनाक होते हैं उन्हें थोड़ा भी छेड़ना खतरनाक हो सकता है । इसके अलावा कुत्तों को एक टीका भी दिया जाता है ताकि यदि ये अगर कभी भी किसी को काट लें तो रेबीज न हो मगर गली – मोहल्ले में रहने वाले ढेर सारे कुत्तों को कौन टीका लगाए । कुत्तों का एक स्वभाव है कि वे बाहरी घुसपैठ को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते चाहे वह इंसान ही क्यों न हो इसलिए कभी – कभी ये लोगों को काट भी लेते हैं इनके नुकीले दांतों के कारण लोग बुरी तरह घायल हो जाते हैं, इसी कारण से बच्चों को कुत्तों से दूर रखना चाहिए क्योंकि इनके हमले से जान भी जा सकती है । कुत्ते के काटने से रेबीज नामक बीमारी हो सकती है जो इन्सान के तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालती है यदि पीड़ित व्यक्ति का इलाज न कराया गया तो उसकी मौत हो सकती है ।
ऐसे कई घटना भी सुनने को मिलती है कि कुत्ते के द्वारा अपने ही मालिक को काटकर मार दिया जाता है इस कारण से लोगों को थोड़ा सावधान भी होना चाहिए । गली – मोहल्ले में रहने वाले कुत्ते भी बहुत खतरनाक होते हैं खास तौर पर रात के समय ये झुंड में रहते हैं और यदि कोई अकेला इंसान दिख जाए तो उसपर भौंकते हैं और कभी – कभी हमला भी कर देते हैं । ऐसी स्थिति में अगर पूरा झुंड हमला कर दे तो इन्सान की जान भी जा सकती है । इससे यह साबित होता है कि कुत्ता इन्सानों का तो दोस्त होता है मगर साथ ही साथ खतरनाक भी ।

कुत्तों पर खतरा

कुत्ता एक पालतू जानवर है मगर हर कोई इसे नहीं पालता और सभी की देखने का नजरिया कुत्तों के लिए सही नहीं रहता है । सभी कुत्ते जो गांव शहर में रहते हैं उनमें से बहुत कम ही कुत्ते इन्सानों द्वारा पालतू होते हैं कई कुत्ते सड़क तथा गलियों में घूमते फिरते रहते हैं और वहीं पर रहते हैं । खास तौर पर भारत में गली कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा होती है । इन कुत्तों के खान – पान कोई निश्चित नहीं रहता क्योंकि अगर किस्मत रहा तो इन्हें खाना मिलता है या भूखे पेट ही सोना पड़ जाता है । भारत में ज्यादातर लोग ऐसे कुत्तों पर निर्दयता दिखाते हैं कुत्तों को पत्थर, डंडा से मारते हैं ।  उन्हें विभिन्न तरह से नुकसान पहुंचाते हैं । कई कुत्तों को तो मार – मार कर जान से मार दिया जाता है । इन सबके अलावा हर वर्ष कई कुत्ते सड़क दुर्घटना में भी मारे जाते हैं । गली के कुत्तों के पास अपना कोई घर नहीं होता इसलिए उन्हें जहां सही लगता है वहीं सो जाते हैं जिस कारण से कई कुत्ते सड़क पर सोने के कारण दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं और उनकी मृत्यु भी हो जाती है ।
कई देशों में कुत्तों को इन्सानों को खाया भी जाता है जैसे कि चीन । चीन एक ऐसा देश है जहां लोग कुत्ते का मांस खाना पसंद करते हैं इसलिए हर रोज कई कुत्तों को भोजन के लिए मार दिया जाता है । ये सभी घटनाएं कुत्तों के भविष्य को देखते हुए सही नहीं है । भविष्य में ऐसा भी संभव है कि गली – मोहल्ले में रहने वाले कुत्तों की प्रजाति विलुप्त ही हो जाए क्योंकि प्रतिवर्ष हजारों कुत्ते सड़क दुर्घटना, बीमारी अथवा इन्सानों द्वारा मारे जाते हैं और इन कुत्तों में अधिकतर कुत्ते गली – मोहल्ले में रहने वाले कुत्ते होते हैं ।

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