छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005

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बढ़ते विकास के साथ जहां देश डिजिटलीकरण की ओर अग्रसर है और नए – नए आविष्कार कर रहा है लेकिन देश में कुछ ऐसे जगह भी हैं आज भी अंधविश्वास के जंजीर से बंधा हुआ है । लोग शिक्षित हो रहे हैं मगर फिर भी अंधविश्वास में विश्वास करते हैं । न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि छत्तीसगढ़ के बाहर भी टोनही के नाम पर औरतों को प्रताड़ित करने की घटना कई बार सामने आ गई है ।  

छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005

क्या होती है टोनही ?

आज तक ऐसे कोई वैध प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि टोनही वास्तव में होते हैं या कभी थे । टोनही को लेकर बस कही – सुनी बातें हैं जिसके अनुसार टोनही एक प्रकार मंत्र – तंत्र और जादू – टोना करने वाली एक बुरी औरत होती है जो काला जादू करके दूसरों को हानि पहुंचाती है । टोनही से संबंधित बातें खास करके गांव – देहात क्षेत्र में सुनने को मिलती है पर टोनही के होने का आज तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है ।

महिलाएं किस तरह प्रभावित हैं

टोनही प्रताड़ना का शिकार गांव की महिलाएं ज्यादा होती है । ऐसी घटना खास तौर पर तब देखने को मिलती है जब संयुक्त रूप से रहने वाले दो परिवारों अथवा पड़ोसियों में आपसी कलह हो और किसी परिवार में दुख – दर्द / रोग का ज्यादा प्रभाव हो तो वे इस सारे घटनाक्रम का आरोप दूसरे मताभेत वाले परिवार के किसी महिला पर लगा देते हैं । इस तरह के घटनाक्रम में प्रभावित महिला को ग्राम की अन्य महिलाएं भी दोषी को दृष्टि से देखती हैं और ऐसी महिलाएं समाज में अलग – थलग पड़ जाती है और लोगों के तानों के कारण ऐसी महिलाएं आत्मदाह के फैसले लेने पर मजबुर हो जाती हैं । इस प्रकार की काफी घटना सुनने में आती है जो बिल्कुल ग़लत और गैरकानूनी होता है । कई बार ऐसी घटना में ग्राम में सभा बुलाकर पूरे समाज द्वारा महिला को प्रताड़ित किया जाता है जिसे गांव से बाहर निकाल देने और जिंदा जला देने की कई घटना सामने आ चुकी है ।

कई परिवारों में दहेज न मिलने पर भी बहु को परिजनों द्वारा ही टोनही कहकर मानसिक और शरीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है । इस टोनही प्रताड़ना में कई महिलाएं अपनी जान भी गंवा देती है । 

किसी को टोनही कहना भारतीय कानून के अनुसार पूरी तरह गैरकानूनी है और यदि कोई महिला इस तरह से प्रताड़ित है तो प्रताड़ित करने वाले को जेल हो सकती है ।

टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005

भारत के कानून के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता का अधिकार है तथा उसके कुछ मौलिक अधिकार है । भारतीय कानून के अनुसार किसी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना उसके अधिकारों का हनन करना है । इस प्रकार के प्रताड़ना से महिलाओं की मुक्ति के लिए 30 सितंबर 2005 को टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 लाया गया । इस अधिनियम के मुताबिक परिभाषा खण्ड (धारा 2) में टोनही, पहचानकर्ता, ओझा व हानि को परिभाषित किया गया है। इन्हें परिभाषित करने का उद्देश्य अपराध में शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके और उचित आरोपी या आरोपियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जा सके । इनकी निम्न परिभाषा है –

टोनही – वह व्यक्ति जिसे किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा उपदर्शित किया जाये कि वह किसी अन्य व्यक्ति अथवा समाज अथवा पशु अथवा जीवित वस्तुओं को काला जादू, बुरी नजर या किसी अन्य रीति से हानि पहुंचायेगा अथवा हानि पहुंचाने की शक्ति रखता है अथवा इस तरह वह हानि पहुंचाने का आशय रखता है चाहे वह डायन, टोनही अथवा किसी अन्य नाम से जाना जाता है।

पहचानकर्ता – वह व्यक्ति जो किसी व्यक्ति को टोनही के रूप में उपदर्शित करता हो या अन्य व्यक्ति को उपदर्शित करने के लिये प्रेरित करता हो या अपने कार्य शब्दों भावभंगिता या व्यवहार से उपदर्शित करने में मदद करता हो या जान बूझकर ऐसा कोई कार्य करता हो जिससे ऐसी पहचान के आधार पर उस व्यक्ति को क्षति पहुंचे अथवा क्षति पहुंचने की आशंका हो अथवा उसकी सुरक्षा एवं सम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

ओझा – व्यक्ति जो यह दावा करता हो कि उसमें झाडफूंक, टोटका, तंत्र मंत्र या अन्य द्वारा टोनही या टोनही द्वारा प्रभावित कहे गये किसी व्यक्ति या पशु या जीवित वस्तुओं को नियंत्रित, उपचारित, शक्तिहीन करने की क्षमता है।

हानि – शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक नुकसान तथा प्रतिष्ठा को नुकसान ।

यदि कोई व्यक्ति “टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005” के अंतर्गत दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ इस अधिनियम के धारा 4,5,6,7,8 के तहत कार्यवाही की जाएगी । ये धारा निम्न प्रकार हैं – 

  • धारा 4 – यदि व्यक्ति किसी भी माध्यम से टोनही के रूप मे पहचान करता है, तो वह तीन वर्ष का कठिन कारावास तथा जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
  • धारा 5 – कोई व्यक्ति किसी को टोनही के रूप मे पहचान कर उसे शारीरिक या मानसिक रूप से नुकसान पहुँचता है, तो उसे पांच वर्ष का कठिन कारावास तथा जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
  • धारा 6 – ऐसे व्यक्ति पर ओझा के रूप मे झाड़फूंक, टोटका, तन्त्र-मंत्र का उपयोग करता है, उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास तथा जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।
  • धारा 7 – किसी व्यक्ति पर काला जादू, बुरी नजर या किसी अन्य रीति से पशु अथवा जीवित वस्तुओं को क्षति पहुंचाने का दावा करता है या ऐसा प्रचार करता है, उसे एक वर्ष तक का कठोर कारावास या जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
  • धारा 8 – इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करने का प्रयास करेगा उसे उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित किया जाएगा।

ये अपराध संज्ञेय अपराध है अगर कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करते हुए पाया जाता है या ऐसे अपराध में सामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया जा सकता है और इस अपराध से संबंधित सभी न्यायिक कार्यवाही प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में किया जाएगा। इस अधिनियम के आने के बाद भी लोगों में शिक्षा की कमी और अंधविश्वास में भरोसा के कारण भी कई ऐसी घटना सामने आ जाती है । कई लोग इस कानून की जानकारी नहीं रखते इसी कारण से वे मदद के लिए पुलिस में सिकायात भी नहीं करते । भले ही ऐसी घटना बहुत कम हो गई है मगर इस प्रकार के घटना को पूरी तरह खत्म हो जाना चाहिए और लोगों में ऐसे कानूनों के बारे में शिक्षा देनी चाहिए ।

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