जीवनी एवं आत्मकथा (Biography and Autobiography In Hindi)

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जीवनी एवं आत्मकथा

जीवनी और आत्मकथा हैं तो दो अलग – अलग शब्द मगर दोनों का लक्ष्य किसी व्यक्ति विशेष के बारे में जानकारी देना होता है । ये दोनों ही साहित्य कि विधाएं हैं । इन दोनों में कुछ चीजें समान है जबकि कुछ चीजें बिल्कुल ही अलग । हिंदी साहित्य में इन दोनों का एक अलग महत्वपूर्ण स्थान है । इन दोनों के बारे में स्पष्टता से अध्ययन का उचित तरीका दोनों में तुलना करना हो सकता है । हिंदी साहित्य में लेखक, लेखिकाओं, कवियों, साहित्यकारों आदि का महत्वपूर्ण स्थान है इसी कारण से पाठकों को इनके बारे में भी जानकारी होनी चाहिए । कई पाठक विभिन्न रचनाओं को पढ़कर रचनाकार के एक प्रशंसक बन जाते हैं तथा रचनाकार तथा उसके रचनाओं के बारे में और अधिक जानने की जिज्ञासा व्यक्त करता है । किसी लेखक, लेखिकाओं, कवियों, साहित्यकारों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी का मुख्य स्त्रोत जीवनी अथवा आत्मकथा को ही माना जाता है ।

जीवनी एवं आत्मकथा में तुलनात्मक अध्ययन / जीवनी एवं आत्मकथा में अंतर

विशेषता जीवनी आत्मकथा
रचनाकार जीवनी का रचना किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विभिन्न प्रकार के खोज एवं विश्लेषण के बाद किया जाता है । इसमें व्यक्ति स्वयं अपने बारे में संपूर्ण घटनाक्रम का रचना करता है ।
शुद्धता इस जानकारी में त्रुटि की संभावना बनी रहती है क्योंकि इसका निर्माण रचनाकार किसी व्यक्ति विशेष की जानकारी विभिन्न स्रोतों अथवा व्यक्ति विशेष को पूछकर करता है जिस कारण से इसमें भूल – चूक की संभावना ज्यादा होती है । इसमें त्रुटि की संभावना अत्यंत कम होती है क्योंकि इसमें व्यक्ति अपनी स्वयं की जानकारी लिखता है । अपने बारे में संपूर्ण जानकारी होने के कारण त्रुटि की संभावना नहीं के बराबर होती है ।
जानकारी इसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक की जानकारी लेखक लिख सकता है । इसके अलावा लेखक उतनी ही जानकारी साझा कर सकता है जितनी अन्य स्रोतों अथवा व्यक्ति लेखक से साझा किया हो । इसमें गुप्त बातों का अभाव हो सकता है जो सिर्फ उस व्यक्ति को पता होगा जिसके बारे में लिखा जा रहा है । इसमें व्यक्ति केवल अपनी जीवित अवस्था अन्यथा स्वस्थ अवस्था तक की ही जानकारी लिख सकता है । इसमें व्यक्ति चाहे तो अपने से संबंधित गुप्त बातों को भी साझा कर सकता है जो किसी अन्य व्यक्ति को पता न हो ।
काल्पनिकता यह किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जानकारी के उद्देश्य से लिखा जाता है इस कारण से इसमें काल्पनिक बातों की गुंजाइश नहीं होती । चूंकि यह स्वयं द्वारा लिखा जाता है इस कारण से लेखक कभी – कभी भावनाओं में बहकर अपनी काल्पनिक बातों को भी लिख सकता है ।
निर्भरता जीवनी लिखने के लिए मुख्यत लेखक जानकारी एकत्रित करने के लिए अपने अलावा अन्य स्रोतों पर आश्रित रहता है । इसमें व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति अथवा स्त्रोत पर आश्रित नहीं होता ।
भाषा इसका भाषा सरल अथवा कठोर हो सकता है । इसमें स्थानीय भाषा अथवा बोली का प्रयोग देखने को नहीं मिलता । इसमें यदि लेखक चाहे तो रोचकता को बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषा एवं बोलियों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकता है ।

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