भारत में आरक्षण की कमियां या दुष्प्रभाव

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 आरक्षण देश में पिछड़े हुए लोगों को साथ लेकर चलने के उद्देश्य से लाया गया था । प्राचीन समय में सभी वर्ग के लोगों को शिक्षा का अधिकार नहीं दिया जाता था जिस कारण से उच्च वर्ग के लोग ही पढ़ पाते थे और निम्न वर्ग के लोगों को शिक्षा के लायक नहीं समझा जाता था । आज के समय में भले ही सभी लोगों को पढ़ने – लिखने का समान अधिकार प्राप्त है मगर पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था, यह कठिनाई हमारे देश के संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर जी ने खुद झेली है । लगभग सभी लोग भी प्राचीन भेदभाव से वाकिफ भी हैं । इन भेदभाव को दूर करने के लिए ही आरक्षण की आवश्यकता पड़ी । यह समाज को साथ लेकर चलने के लिए जरूरी भी था क्योंकि एक ओर लोग आगे बढ़ रहें और दूसरी ओर लोग अशिक्षित और पिछड़े हो ये भी सही नहीं था । तब इसकी सख्त आवश्यता थी ।

आज लगभग सभी वर्ग के लोगों को समाज में इस प्रयास को वजह से सामान स्थान मिल गया है जो बाबा भीमराव अंबेडकर जी के प्रयासों का परिणाम है । जब आरक्षण को लागू किया गया था तब यह आवश्यक था मगर आज इसकी आवश्यकता रहते – रहते भी इसका दुरुपयोग किया जा रहा है । ऐसा कहना बिल्कुल उचित नहीं है कि आरक्षण को पूरी तरह से समाज से हटा देना चाहिए क्योंकि अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो समाज में पिछड़े हुए हैं और उन्हें इसकी जरूरत है । मगर समाज में आरक्षण के कुछ दुष्प्रभाव भी है जिस कारण से कई काबिलियत हुनर के नीचे दब जा रही है । काबिल रहने के बावजूद भी समाज में वह स्थान प्राप्त नहीं कर पा रहे जिसके वो हकदार हैं । काबिल व्यक्ति के स्थान पर तुलना में कम काबिल व्यक्ति स्थान ले रहा है । यहां कहने का तात्पर्य आरक्षण को ग़लत साबित करना नहीं बल्कि काबिल व्यक्ति के हक की बात है । जब कोई काबिल व्यक्ति किसी मुकाम को पहुंचने के लिए बहुत मेहनत करता है और रात – दिन कड़ी मेहनत करके सफलता को प्राप्त करने ही वाला होता है तब उसका स्थान कोई ऐसा व्यक्ति ले लेता है जो उसकी तुलना में कम मेहनत किए रहता है । ऐसे स्थिति में किसे गलत साबित किया जाए ।

आरक्षण मिलना चाहिए, समाज में पिछड़े लोगों को समाज में समान अधिकार देने के लिए आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन काबिल व्यक्ति के स्थान पर कम काबिल व्यक्ति को स्थान नहीं देना चाहिए । आरक्षण को जाति के आधार पर देना आज के समय में सही नहीं है क्योंकि आज हर जाति वर्ग के लोग समाज में साथ आ गए हैं । ऐसा कोई भी जाती नहीं है जो समाज में अत्यंत पिछड़ा है । कुछ क्षेत्र हैं ऐसे जो विभिन्न स्तरों पर पिछड़े हुए हैं हो सकता है कि वे एक ही जाति वर्ग के हों पर वो जाति वर्ग के आधार पर पिछड़े हुए नहीं हैं अपितु वे क्षेत्र के आधार पर पिछड़े हुवे हैं । जाति वर्ग के आधार पर आरक्षण होने पर कुछ समृद्ध व्यक्ति भी इसका लाभ उठा लेते हैं जो समाज में संपन्न हैं इस तरह जरूरतमंद व्यक्ति को यह आरक्षण नहीं मिल पाती और कई गैर काबिल लोग भी इसका फायदा उठा लेते हैं । इससे सही व्यक्ति को तो आरक्षण नहीं मिल पाता साथ ही काबिल व्यक्ति भी एक अपने से कम काबिल व्यक्ति से हार जाता है । काबिल व्यक्ति को जिस पिछड़े व्यक्ति के लिए कुर्बान किया जाता है वो उस पिछड़ा व्यक्ति को तो नहीं मिल पाता जिसे जरूरत होती है बल्कि कुछ ऐसे लोगों को मिल जाता है जिसे इसका जरूरत नहीं होता । इस तरह पिछड़े और काबिल व्यक्ति दोनों का नुक़सान हो जाता है यहां वह फायदा उठा जाता है जो कम काबिल होता है और जिसे आरक्षण की आवश्यता नहीं होती ऐसे में उस व्यक्ति के लिए आरक्षण सोने के लड्डू के समान हो जाता है । 

आरक्षण पिछड़े लोगों के लिए जरूरी है लेकिन इसे लागू करने से पहले इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि आरक्षण के नीचे कोई प्रतिभाशाली व्यक्ति न दब जाए । कई बार ऐसा देखा गया है कि कई चयन परीक्षाओं में चाहे वो भर्ती परीक्षा हो या रोजगार परीक्षा में अधिक अंक वाले प्रतिभाशाली का चयन नहीं हो पाता जबकि उसके तुलना में बहुत कम अंक प्राप्त करने वाले का चयन हो जाता है । ऐसे स्थिति में यह प्रतिभाशाली के मन में गलत प्रभाव भी डालती है और यह प्रभाव पड़ना निश्चित है क्योंकि दूसरे के ऊपर गलत होने पर भले ही कोई ध्यान न दे पर खुद के ऊपर जब गलत होता है तब बुरा तो लगता ही है । ऐसे अनेकों मामला है पर किसी का नाम लेना भी उचित नहीं है क्योंकि कई बार गलती दोनों का ही नहीं होता ।

आरक्षण गलत नहीं है मगर कई बार काबिल व्यक्ति को उसका वह स्थान नहीं मिल पाता जिसका वह हकदार है । आरक्षण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव वर्ग अथवा जातिगत आरक्षण में देखने को मिलता है । जातिगत आरक्षण में उच्च वर्ग के लोगों को निम्न वर्ग की तुलना में अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है । शिक्षा के क्षेत्र में यदि कहीं पर दाखिला लेना हो तो उच्च वर्ग के लोगों को अन्य वर्गों की तुलना में श्रेष्ठ रिजल्ट की आवश्यकता होती है । यह बात तो सबको पता है कि कोई भी कॉलेज या स्कूल में दाखिला या तो मेरिट लिस्ट के अनुसार किया जाता है अथवा प्रवेश परीक्षा के रूप में । जातिगत रूप से सबसे ज्यादा आरक्षण अनुसूचित जाति तथा जनजाति को प्राप्त है , इसके अन्य पश्चात पिछड़ा वर्ग को प्राप्त है । लेकिन यहां सामान्य वर्ग के लोगों को किसी भी तरह का आरक्षण प्राप्त नहीं होता । सामान्य वर्ग के लोगों को बाकी तीनों वर्गों की तुलना में अधिक अंक की आवश्यकता है तभी उसका दाखिला हो पाता है । इस तरह हमारे समाज को आरक्षण की आवश्यकता तो है मगर इसके कुछ दुष्प्रभाव या कमियां भी है जिसे दूर करना आवश्यक भी है ।

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